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रोज मौत की घाटी पार कर स्कूल जाते बच्चे

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स्कूल जाने के लिए बच्चों को आपने पैदल चलते, तो कभी साइकिल, ऑटोरिक्शा या फिर बस की सवारी करते कई बार देखा होगा। लेकिन यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि दुनिया में एक स्थान ऎसा भी है, जहां स्कूल जाना इतना आसान नहीं है। जी हां, यहां बच्चों को पहाडियों के बीच जिप तारों पर घिर्री की सहायता से लटकते हुए करीब 40 मील प्रति घंटे की गति से रास्ता तय करना पडता है, जिससे वे नियमित रूप से कक्षाओं तक पहुंच सकें। 'डेली मेल' की खबर के अनुसार कोलंबिया में रियो नेग्रो नदी से करीब 400 मीटर ऊंचाई पर इन तारों की व्यवस्था है। दूसरे छोर पर पहुंचने के लिए बच्चे आधे मील की दूरी तय करते हैं।
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राजधानी बोगोटा से 40 मील दक्षिण-पूर्व पर स्थित इस क्षेत्र में रह रहे कुछ परिवारों के लिए यहां एक घाटी को दूसरी घाटी से जोडने के लिए इस तरह के 12 स्टील केबल एकमात्र जरिया हैं। बताया जा रहा है कि सबसे पहले जर्मनी के अन्वेषणकर्ता अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट ने 1804 में इन विशेष रास्तों को देखा था। तब इन्हें पारंपरिक रूप से सन (हैंप) से बनाया जाता था। बाद में इनकी जगह स्टील केबल्स लगाए गए। इसके बाद यहां लोगों ने खेती और पशुपालन करने की शुरूआत कर दी।
आवाजाही का एकमात्र जरिया वर्तमान में यहां रह रहे सभी लोगों के लिए दूसरे स्थान तक पहुँचने के लिए कोई अन्य जरिया नहीं है। ये सभी पूरी तरह से इन्हीं केबल्स पर निर्भर हैं। किसानों को अपने उत्पादों को अन्य स्थानों पर पहंुचाना हो, या फिर नन्हे बच्चों को स्कूल जाना हो, सभी को इन्हीं तारों से होकर गुजरना होता है। कई बार बच्चों को गति को नियंत्रित करने के लिए खुद को जूट बैग में बैठाकर कुल्हाडी जैसे यंत्र की मदद से संतुलन बनाते हुए चलते हुए भी देखा जा सकता है।
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