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Home Loan - सावधानी से करें फाइनेंसर का चुनाव

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Home_loan_financeरीयल एस्टेट (Real Estate) कीमतों और होम लोन की ब्याज दरों में कमी से बाजार में हलचल फिर तेज हो गई है। नए प्रोजेक्ट्स लांच हो रहे हैं और उनके खरीदार भी फिर नजर आने लगे हैं। ऐसे में ग्राहक के सामने होम लोन और घर के विकल्पों की संख्या बढ़ रही है, तो खुद खरीदार को भी काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। रीयल एस्टेट कंसलटेंसी फर्म ‘डीटीजेड’ के अनुसार पिछले 6-9 माह में बड़े डिवेलपर्स द्वारा लांच किए गए लगभग सभी नए प्रोजेक्ट्स अफोर्डेबल हाउसिंग कैटेगिरी में हैं। खास बात यह है कि ये टियर 1 सिटीज जैसे- दिल्ली-एनसीआर, मुम्बई, बेंगलुरू, पुणे जैसे बड़े शहरों में हैं, जहां आम आदमी के लिए अपने बजट में घर खरीदना कभी सपना होता था। लोगों ने इनके प्रति उत्साह भी दिखाया है। कंपनियां लांचिंग के पहले ही दिन 100 प्रतिशत तक की बुकिंग का दावा कर रही हैं। उधर, डिवेलपर्स मकान की कीमत का 15-20 प्रतिशत बुकिंग कराने के कुछ ही महीनों के अंदर ले लेते हैं। भले ही कंस्ट्रक्शन शुरू हुआ हो या नहीं? बाकी भुगतान के लिए आमतौर पर तीन तरीके होते हैं। कैश डाउन, कंस्ट्रक्शन लिंक्ड और फ्लेक्सिबल प्लान। कैश डाउन में सारी रकम एक साथ देनी होती है, इसलिए ज्यादातर ग्राहक कंस्ट्रक्शन लिंक्ड और फ्लेक्सिबल प्लान के साथ जाते हैं। कंस्ट्रक्शन लिंक्ड में जैसे-जैसे कंस्ट्रक्शन आगे बढ़ता है, आपसे भुगतान लिया जाता है।

फ्लेक्सिबल प्लान में कंस्ट्रक्शन के दौरान निश्चित रकम समयांतर पर ली जाती रहती है और बाकी रकम पजेशन के समय देनी होती है। कुल मिलाकर डिवेलपर के पास प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए फाइनेंस का अच्छा-खासा इंतजाम हो जाता है। रिपोर्ट के अनुसार लिक्विडिटी के दबाव और रीयल एस्टेट के ज्यादातर सेगमेंट्स में बिक्री के बावजूद डिवेलपर्स टिअर 1 सिटीज में अपनी उपस्थिति और साख बनाए रखना चाहते हैं। इसका कुल असर ग्रुप की सफलता पर पड़ता है।

इन दिनों अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स डिमांड में हैं, इसलिए वे इन शहरों में ऐसे ही प्रोजेक्ट्स लांच कर रहे हैं। ज्यादातर डिवेलपर्स ने बैंकों से लोन लेकर टिअर 2 और 3 सिटीज में जमीन खरीदी है, लेकिन वहां फ्लैट्स की मांग तेजी नहीं हो सकी है। इस स्थिति को डिवलेपर्स ज्यादा समय तक सहन नहीं कर सकते। उन्हें अपना लोन वापस करने के लिए प्रोजेक्ट्स बेचना जरूरी है। यह बिक्री टिअर 1 सिटीज में हासिल होती है। ऐसे संभावना बढ़ जाती है कि बुकिंग अमाउंट के रूप में प्रयोग किए जाए, न कि कंस्ट्रक्शन में। इसका असर समय से डिलीवरी पर पड़ सकता है। इस आशंका के चलते ग्राहक को भी प्रॉपर्टी फाइनल करने से पहले थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। सबसे पहले भरोसेमंद फाइनेंसर की तलाश करनी चाहिए।


सही फाइनेंसर (Financer) का चुनाव
सरकारी या निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित बैंक या फाइनेंसर कंपनी से ही होम लोन लें। ऐसी जगह से लोन लेने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रॉपर्टी की जांच की जिम्मेदारी आपका फाइनेंसर भी संभालेगा। कंपनियां अपनी रकम की वापसी सुनिश्चित करने के लिए गलत प्रॉपर्टी पर लोन देने से बचती हैं। इसके लिए उनकी अपनी रिसर्च टीम होती है जो प्रॉपर्टी से जुड़े नियम-कानूनों की जांच करती है। टीम देखती है कि डिवेलपर (Developer) ने भी विभागों से अनुमति ली है या नहीं, जमीन विवादित तो नहीं है, प्रोजेक्ट समय पर पूरा होने का क्या संभावना है आदि है। टीम इस बात की भी जांच करती है फलां प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए डिवेलपर के पास पर्याप्त फाइनेंस है या नहीं, जिससे कंस्ट्रक्शन रूकने का डर पैदा न हो। कुल मिलाकर, प्रॉपर्टी सही होने पर ही उस पर लोन जारी किया जाता है। मान लिजिए, आप उसी बैंक से लोन चाहते हैं, जिसमें आपका सैलरी अकाउंट है, तब भी यह पता करना चाहिए कि अन्य बैंकों और फाइनेंस कंपनियों ने उस प्रॉपर्टी को अप्रूव किया है या नहीं? अगर किसी एक ने भी उसे अप्रूव करने से मना किया हो, तो वहां इनवेस्ट करने से बचें, भले ही आपके अकाउंट वाला बैंक उस पर लोन देने के लिए तैयार हो। ध्यान रहे कि लोन सेंक्शन होने के बाद भी पूरी लोन अवधि के दौरान आपका अपने फाइनेंसर के साथ संपर्क बनाए रखना होगा, इसलिए आपके फाइनेंसर की कस्टमर केयर पॉलिसी अच्छी होनी चाहिए। कस्टमर के प्रति कंपनी या बैंक का रवैया जानने के लिए उसके पुराने ग्राहकों से संपर्क कर सकते हैं। कंपनी का पुराना रिकॉर्ड भी चेक करें कि उसने ब्याज दरों में कमी का कितना फायदा अपने ग्राहकों को दिया है और वह कंपनी ब्याज दरें सबसे पहले बढ़ाने वालों में से तो नहीं है? इस तरह आप सही फाइनेंसर का चुनाव कर सकेंगे।



डिवेलपर्स (Developers) को भुगतान
अब बात डिवेलपर्स को भुगतान करने की। इसके लिए आमतौर पर कंस्ट्रक्शन लिंक्ड प्लान चुनना चाहिए। ज्यादातर बिल्डर कैश डाउन पेमेंट प्लान में 15-20 प्रतिशत की छूट देते हैं। फ्लैट की रकम एक साथ चुकाने पर भले ही आपको छूट मिल जाए, लेकिन इसके लिए आपको बैंक से सारा लोन एक साथ लेना होगा। इसका मतलब लोन की पूरी रकम पर पहले दिन से ही ब्याज लगना शुरू हो जाएगा, यानी पहले ही दिन से ज्यादा ईएमआई। कंस्ट्रक्शन लिंक्ड प्लान लेने पर शुरुआती दिनों में आप पर ब्याज का ज्यादा भार नहीं पड़ेगा, साथ ही आप प्रोजेक्ट को देरी से बचाने में एक हद तक मददगार भी होंगे। आज जब ज्यादातर बिल्डर कैश फ्लो में कमी से जूझ रहे हैं, तो कंस्ट्रक्शन लिंक्ड प्लान चुनना ही समझदारी है। आपसे अगली किस्त लेने के लिए डिवेलपर पर प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करते रहने का दबाव बना रहेगा। इससे आप भी तय समय पर अपने घर में जा सकेंगे।

Article Tag - (Real Estate, Home Loan, Bank, Developer, Financer)


 

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